काबुल। आज अफगानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव है। यह हर अफगानी
नागरिक के लिए ऐतिहासिक दिन माना जा रहा है। बीते एक दशक से अफगानिस्तान
नाटो और अमेरिकी फौजों का अड्डा बना हुआ है। तालिबान के देश से कब्जा
छुड़ाने के बाद हामिद करजई देश के पहले राष्ट्रपति बने थे। यह पहली बार है
जब लोकतांत्रिक ढंग से सत्ता नए चुने हुए नेता को दी जाएगी।
सितंबर 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले के जवाब ने
अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को खोजने और तालिबान को कुचलने के लिए
अफगानिस्तान पर सैन्य हमला बोला था। इस बात को एक दशक से भी ज्यादा का समय
हो गया, लेकिन अमेरिकी सेना अभी भी देश में शांति स्थापित नहीं कर पाई है।
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